राजधानी दिल्ली और एनसीआर में पटाखों पर बैन अभी जारी रहेगा। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कोई भी ढील देने से इनकार कर दिया। पटाखों को बनाने, रखने और बिक्री पर रोक पहले की ही तरह जारी रहेगी। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट की ओर से इस पूरे मसले पर तल्ख टिप्पणी की गई।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आबादी का एक बड़ा हिस्सा सड़कों के आस-पास काम करता है और हर कोई घर में एयर प्यूरीफायर नहीं लगवा सकता।
कोर्ट ने कहा कि पिछले छह महीनों में इस अदालत द्वारा पारित कई आदेशों में दिल्ली में वायु प्रदूषण के बहुत उच्च स्तर के कारण उत्पन्न भयावह स्थिति को रिकॉर्ड में लाया गया है।
कोर्ट की ओर से कहा गया कि स्वास्थ्य का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 का एक अनिवार्य हिस्सा है, वैसे ही प्रदूषण मुक्त वातावरण में रहने का अधिकार भी है।
जब तक उसे यह विश्वास नहीं हो जाता कि ‘तथाकथित’ ग्रीन पटाखों के कारण होने वाला प्रदूषण न्यूनतम है, तब तक पिछले आदेशों पर पुनर्विचार करने का कोई सवाल ही नहीं उठता।
सुप्रीम कोर्ट की ओर से की गई टिप्पणी में यह बात कही गई। जस्टिस अभय ओका और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने पटाखा निर्माताओं की ओर से उठाए गए तर्कों को खारिज कर दिया।
पिछले साल दिसंबर में, दिल्ली सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म सहित पटाखों के निर्माण, उपयोग और बिक्री पर “स्थायी प्रतिबंध” लगा दिया था।
अदालत ने कहा कि कुछ महीनों के लिए प्रतिबंध लगाने से कोई फायदा नहीं है, क्योंकि पटाखों की बिक्री साल भर चलती रहेगी और लोग प्रतिबंध के दौरान उनका भंडारण और उपयोग करते रहेंगे। ग्रीन पटाखों के बारे में, अदालत ने कहा कि केंद्र सरकार की रिपोर्ट के अनुसार, वे पारंपरिक पटाखों की तुलना में केवल 30% कम प्रदूषण फैलाते हैं।