लखनऊ। बीते कुछ समय से इंडिया ब्लॉक के भविष्य पर सवाल खड़े हो रहे हैं। इसकी बड़ी वजह गठबंधन से जुड़ी पार्टियां ही हैं। शिवसेना यूबीटी गुट के नेता संजय राउत, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, जम्मू कश्मीर के सीएम उमर अब्दुल्ला, राजद के नेता तेजस्वी यादव ही गठबंधन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहे हैं। उमर अब्दुल्ला ने तो यहां तक कह दिया है कि इंडिया गठबंधन को खत्म कर देना चाहिए। इन सबके बीच इंडिया गठबंधन से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। दरअसल इंडिया में जान फूंकने के लिए नए सिरे से तैयारियां की जाएगी। सूत्रों की मानें तो जल्द ही गठबंधन की बैठक दिल्ली में आहूत की जाएगी। इस बैठक में क्षेत्रीय दलों की भूमिका बढ़ाने पर मंथन होगा। इसके बाद लखनऊ में भी बड़ी बैठक आयोजिक की जाएगी। जिसमें कई पार्टियां शिरकत कर सकती है।
गठबंधन के सूत्र बताते हैं कि इन सबके उलट सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गठबंधन को मजबूत करने की रणनीति बनाई है। शीघ्र ही गठबंधन की समन्वय समिति की बैठक होगी। इसमें सभी घटक दलों के प्रमुख नेता शामिल होंगे। सभी मुद्दों पर विस्तार से बात होगी। हर बैठक में अगली बैठक की संभावित तिथि व माह की भी घोषणा की जाएगी। सपा ने यह भी फॉर्मूला तय किया है कि इंडिया ब्लॉक में क्षेत्रीय दलों की भूमिका को बढ़ाया जाए। तृणमूल कांग्रेस पहले ही कह चुकी है कि गठबंधन का नेतृत्व ममता बनर्जी को दिया जाए। सूत्र बताते हैं कि ममता बनर्जी को संयोजक बनाए जाने पर सपा को भी कोई आपत्ति नहीं होगी।
कांग्रेस का शेयर होगा ज्यादा
इससे पहले राजग में भी दूसरे-तीसरे नंबर के राजनीतिक दलों को यह जिम्मेदारी मिलती रही है। समाजवादी नेता जार्ज फर्नांडीज और शरद यादव भी राजग के संयोजक की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। इसलिए क्षेत्रीय दलों का मानना है कि इंडिया गठबंधन में भी यह प्रयोग करने में कोई हर्ज नहीं है। कोशिश है कि राज्यों के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस उस राज्य के सबसे बड़े विपक्षी दल के नेतृत्व में काम करे। वहीं, जब भी लोकसभा चुनाव हों तो राष्ट्रीय राजनीति के मद्देनजर सीटों का बंटवारा हो। जाहिर है कि इसमें कांग्रेस का शेयर ज्यादा रहेगा।