ख़ास खबर
सत्ता की रेस से बाहर कांग्रेस!

भोपाल / ​शिवराज सरकार के एक मंत्री की प्रदेश कांग्रेस को लेकर टिप्पणी थी, मध्यप्रदेश में कांग्रेस के हालात हजार और पांच सौ के उस बंद हुए नोट की तरह हो गए हैं जो कहने भर को है बाकी बाजार में उनकी कोई कीमत नहीं बची। ये इत्तेफाक नहीं है कि मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सियासत के सार का तर्जुमा हर बार हार ही होता है. लेकिन पार्टी में इस हार से सबक नहीं लिए जाते। पार्टी के भीतर इस हार पर सवाल जवाब जरुर होते हैं। एक दूसरे पर प्रहार भी होते हैं। लेकिन मध्यप्रदेश में चुक रही कांग्रेस फिर भी उन वजहों तक नहीं पहुंच पाती कि चूक हो कहां रही है। शहडोल और नेपानगर की हार के बाद भी हालात कमोबेश यही हैं। शहडोल और नेपानगर की हार के बाद,अब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव फिर निशाने पर हैं। जैसी कि हर चुनाव के बाद रिवायत रही है तो इस बार भी, आलाकमान तक अरुण यादव की शिकायतें किस्तों में पहुंचने लगी हैं।

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एयरफोर्स के पूर्व चीफ ने क्या किया ऐसा कि हो गए गिरफ्तार
पढ़िए, ट्रिपल तलाक पर क्या कहा हाई कोर्ट ने
अलविदा अम्‍मा!
आडवाणी को आया गुस्सा तो ऐसी हुई मंत्रियों की हालत
नहीं रहीं 'अम्मा', मरीना बीच में आज अंतिम संस्कार
...और ममता की तृणमूल की चकल्लस का शिकार हो गई चर्चा
छह दिसम्बर को राम राम
इसे पढ़े वो, जो बुरहान वानी को कहते हैं, ‘निर्दोष’ जिसे पाकिस्तान कहता है ‘शहीद’
सैलरी तो आएगी, लेकिन पैसा मिलेगा क्या...!
नए साल में तीन नई योजनाओं पर अमल करेंगे शिवराज
फिर कांग्रेस चित जीत के विश्वास ने हराया
पुलिस बनकर घुसे, फायरिंग कर ले उड़े आतंकवादी को
न पाक को पानी मिलेगा; न काला धन वालों को चैन
कांग्रेस के दिग्गजों ने ही हरवा दिया पार्टी को!


फर्स्ट कॉलम (प्रकाश भटनागर)

झटके की जरूरत तो कांग्रेस को है राहुल बाबा


 

राहुल गांधी यकीनन फिल्मी नहीं। लेकिन उनका डायलॉग एकदम फिल्मी है। हिन्दी सिनेमा में बहुत चर्चित रहा है ये संवाद कि अब मेरा मुंह मत खुलवाओ मैं बोलूंगा तो.....। बिल्कुल उसी अंदाज में नोटबंदी पर राहुल गांधी बोले लेकिन कुछ ज्यादा बोल गए। अब ये उनका भाषण तैयार करने वाले की चूक है या फिर ये खुद भाव में बहे राहुल गांधी ने जोड़ दिया। लेकिन राहुल गांधी की ये ताजा दहाड़ कि जब मैं बोलूंगा तो भूकंप आ जाएगा। तो राहुल बाबा ये बात कुछ हजम नहीं हुई। हजम यूं नहीं हुई कि अगर आपके बोलने से भूकंप आता तो बीते विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में उसकी हलचल सुनाई या दिखाई देती।

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प्रमुख खबरें

नहीं रहे पूर्व सीनेटर व अंतरिक्ष यात्री जॉन ग्लेन


 

ह्यूस्टन:अमरीका के पूर्व सीनेटर एवं अंतरिक्ष यात्री जॉन ग्लेन का आेहायो में निधन हो गया।ग्लेन पृथ्वी की कक्षा में जाने वाले पहले अमरीकी थे।वह 95 वर्ष के थे। नासा ने ग्लेन के निधन के तत्काल बाद ट्वीट किया,‘‘हम पृथ्वी की कक्षा में जाने वाले पहले अमरीकी जॉन ग्लेन के निधन से दुखी हैं।वह एक सच्चे अमरीकी नायक थे। ईश्वर जॉन ग्लेन की आत्मा को शांति देे।’’इससे पहले आेहायो स्टेट यूनिवर्सिटी के उस कॉलेज के एक प्रवक्ता ने उन्हें अस्पताल में भर्ती किए जाने की जानकारी दी थी जिस कॉलेज का नाम अमरीका के इस बुजुर्ग अंतरिक्ष यात्री के नाम पर जॉन ग्लेन कॉलेज रखा गया है।बाद में जॉन ग्लेन कॉलेज ऑफ पब्लिक अफेयर्स ने अपनी वेबसाइट पर घोषणा की कि ग्लेन का आेहायो में कोलंबस के जेम्स कैंसर अस्पताल में कल निधन हो गया।

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राजनीति

‘अम्मा’ के जाते ही ऐसा हाल हो रहा कुनबे का


 

दो प्रमुख जाति समूहों के बीच सत्ता संघर्ष का खेल सोमवार से ही खेला जा रहा है। यहां तक की समर्थकों के बीच ‘अम्मा’ के संबोधन से मशहूर जयललिता की मौत से पहले ही उनकी कुर्सी को लेकर ये सब शुरू हो चुका था। एक राष्ट्रीय अंग्रेजी दैनिक से बात करते हुए कुछ विधायकों ने बताया कि पार्टी के महासचिव के रूप में वे शशिकला को समर्थन देंगे।

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भोपाल समाचार

मार्च तक सभी 52 हजार गांव जुड़ जाएंगे सड़क से


 

भोपाल / प्रदेश के सभी 52 हजार गांवों को चालू वित्तीय वर्ष के अंत तक (31 मार्च 2017) सड़कों से जोड़ दिया जाएगा। ये घोषणा विधानसभा में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री गोपाल भार्गव ने की। शीतकालीन सत्र के चौथे दिन गुरुवार को विधायक रंजना बघेल और डॉ. राजेंद्र पांडेय ने गांवों में सड़कों को लेकर सवाल किया था। विधायक बघेल ने सवाल तो मनावर क्षेत्र की सड़कों को लेकर किया था, पर विधायक डॉ. राजेंद्र पांडे ने पूछा कि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और अन्य योजनाओं के तहत इतनी सड़कें बनने के बावजूद की प्रदेश की कई प्रमुख लिंक मार्ग नहीं बन पाए हैं। इस पर मंत्री भार्गव ने बताया कि प्रधानमंत्री सड़क योजना के तहत केंद्र सरकार ने हमें स्वीकृति दे दी कि 500 से ज्यादा आबादी वाले सभी गांवों को सड़कों, पुल-पुलियाओं से जोड़ा जाए।

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राज्य

लूशन के बगीचा में गंदगी का अंबार, जीतकर घर बैठ गए पार्षद


 

गुना / स्वच्छ भारत अभियान अंतर्गत चलाया जा रहा स्वच्छता अभियान सिर्फ दिखावा साबित हो रहा है। जहां शहर के कई वार्डों में गंदगी का अम्बार लगा हुआ है। शहर को साफ-स्वच्छ बनाने के लिए नगरपालिका भले की लाख जतन कर रही हो। लेकिन यह जतन सिर्फ धरे ही रहे हैं। दरअसल, नगर पालिका भी शहर को स्वच्छता अभियान में नम्बर-1 बनाने के लिए दिन-रात मेहनत करने के साथ शहर के गली-मोहल्लों और वार्डों में जगह-जगह सफाई अभियान चला रही हैं। और घरों से कचरा इकठ्ठा किया जा रहा है इसके बावजूद भी शहर के कई वार्डों की हालत है कि वहां के लोगों का गंदगी के कारण जीना दूभर हो चुका है।

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सियासी तर्जुमा

अभी म्यान में नहीं गई हैं चाचा-भतीजे की तलवारें


 

आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे पर उदघाटन समारोह में रामगोपाल यादव और शिवपाल यादव साथ-साथ दिखाई दे रहे थे, वहीं चाचा-भतीजा भी आमना-सामना होने पर अपने-अपने चेहरे पर मुस्कान लाकर \'अब सब कुछ ठीक है\' का पैगाम देने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन दोनों के बीच बढ़ी तल्खी की चिंगारी अभी ठंडी नहीं पड़ी है। इसकी एक वजह टिकटों के लिए मौजूदा विधायकों और 2012 के चुनाव में दूसरे नंबर पर रहे उम्मीदवारों का दोबारा सर्वे कराए जाना भी है।

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मनोरंजन

दिलकश अदाओं से दर्शकों को दीवाना बनाया दीया मिर्जा ने


 

मुबंई: बॉलीवुड में दीया मिर्जा को एक ऐसी अभिनेत्री के तौर पर शुमार किया जाता है जिन्होंने अपनी दिलकश अदाओं से दर्शकों को दीवाना बनाया है। 09 दिसंबर 1981 को आन्ध्र प्रदेश के हैदराबाद में जन्मी दीया ने अपने कैरियर की शुरूआत टीवी पर विज्ञापन फिल्मों से की। वर्ष 2000 में दीया मिर्जा ने मिस इंडिया प्रतियोगिता में हिस्सा लिया जिसमें वह दूसरे स्थान पर रही। इसके बाद दीया को मिस एशिया पेसेफिक प्रतियोगिता के लिए भेजा गया जिसमें वह प्रथम चुनी गयी।

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अटपटी

‘सुहाग रात है...खर्राटे भर रहा हूं मैं’


 

गुजरे दौर की चर्चित फिल्म ‘कभी-कभी’ के शीर्षक गीत की एक पंक्ति है, ‘...सुहाग रात है, घूंघट उठा रहा हूं मैं...’ फिल्म में नायक अमिताभ बच्चन तसव्वुर में यह पंक्तियां गाते हैं, लेकिन हकीकत में यह पंक्तियां गा रहा होगा पंकज, वह भी कुछ बदले अंदाज में। मुमकिन है, वह गा रहा हो, ‘...सुहाग रात है, खर्राटे भर रहा हूं मैं...’ पढ़िए रोचक मामला

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व्यापार

सैंसेक्स 48 अंक चढ़ा


 

नई दिल्लीः भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत बढ़त के साथ हुई। प्रमुख सूचकांक सैंसेक्स 48.28 अंकों की तेजी के साथ 26742.56 के स्तर पर और निफ्टी 5.35 अंकों की तेजी के साथ 8252.20 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। मिडकैप और स्‍मॉलकैप के शेयर भी हरे निशान में नजर आ रहे हैं। हालांकि दोनों ही छोटे और मंझोले शेयरों में काफी कम अंक की बढ़त देखने को मिल रही है। सबसे ज्यादा तेजी आईटी सैक्टर में इंडेक्स की बात करें तो बैंक, फाइनेंशियल सर्विस (0.26 फीसदी), फार्मा (0.17 फीसदी) को छोड़ सभी सूचकांक हरे निशान में कारोबार कर रहे हैं। सबसे ज्यादा तेजी आईटी (1.18 फीसदी) सैक्टर में देखने के मिल रही है।

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खेल

हैदराबाद में खेलने काफी क्रेजी है सानिया मिर्जा


 

हैदराबाद: टोक्यो और सिंगापुर के बाद इंटरनैशनल प्रीमियर टैनिस लीग (आईपीटीएल) का तीसरा चरण अब शुक्रवार से यहां खेला जाएगा जिसमें भारतीय टैनिस स्टार सानिया मिर्जा इंडियन एसेस की अगुवाई करती नजर आएंगी। सानिया ने कहा कि अपने घर हैदराबाद में खेलने लेकर मैं बेहद उत्साहित हूं। वह शहर खेलों का धनी है और वहां से अच्छे एथलीट उभरकर निकले हैं। वहां के लोग टैनिस को बहुत पसंद करते हैं और मुझे उम्मीद है कि टूर्नामैंट के दौरान हमें उनसे काफी समर्थन मिलेगा। महिला युगल में विश्व की नंबर वन सानिया गत वर्ष अप्रैल के बाद पहली बार अपने घर में कोई मैच खेलने उतरेगी। टैनिस स्टार ने कहा कि वहां पर खेलना मेरे लिए बेहद खास है। घर में खेलना मेरे लिए हमेशा से ही खास रहा है क्योंकि वही एक ऐसी जगह है जहां से मैंने अपने खेल की शुरुआत की थी और मेरा करियर शुरु हुआ था। तीसरे चरण का आयोजन हैदराबाद के गाचीबावली इंडोर स्टेडियम में 9 से 11 दिसंबर तक खेला जाएगा। सानिया ने न केवल विश्व में नंबर वन महिला युगल खिलाड़ी है बल्कि वह एक ग्लोबल आइकन भी है।

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विश्लेषण

तो क्या रोक लग गई है तीन तलाक पर....!


 

‘तीन तलाक’ पर चल रही बहस इलाहाबाद हाई कोर्ट की एक टिप्पणी फिर से गर्मा गई है। कई लोगों ने ये मान लिया कि इलाहाबाद हाई कोर्ट ने \'तीन तलाक\' को असंवैधानिक करार दिया है। पर सच्चाई क्या है, यह हम आपको बता रहे हैं-

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शख्सियत

राज नटराजन के अचानक उपजे पत्नी प्रेम का


 

पार्टी सूत्रों का कहना है कि नटराजन और उनके शशिकला के भाई दिवाकरण फिलहाल उनके सबसे मुख्य सलाहकार हैं। कुछ लोगों का यह भी कहना है कि एक लॉबिस्ट के तौर पर नटराजन दिल्ली में पार्टी के लिए बड़े काम कर सकते हैं। करीब 60 साल के नटराजन 1965 में उस वक्त डीएमके नेताओं के संपर्क में आए थे, जब उन्होंने एक छात्र नेता के तौर पर हिंदी के खिलाफ आंदोलन किया था।

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